परिचय
पंडो लोग भारत के अनुसुचित जनजाति है। छत्तिसगढ़ के उत्तर और पूर्व भाग में 2,50,000 पंडो लोग रहते है। बलरामपुर और रायगढ़, और पड़ोसी जिला सरगुजिहा, बिलासपुर में भी पंडो लोग पाए जाते है। पंडो लोग अपना जीवन बिताने के लिए आपने परंपरा के अनुसार जंगल को आश्रय करते है और अपने रोजी के लिए खेती, पसु-पालन और जंगल में अपना जिन्दगी बिताने के लिए कमाते है
इतिहास
महाभारत का भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। महाभारत में दो समूह हैं—कौरव और पांडव। महाकाव्य के अनुसार, पांडवों ने अपने जीवन का कुछ साल वनवास के रूप में जंगल में बिताया। पांडो लोग मानते हैं कि वे वनवास के दौरान पांडवों के वंशज हैं। इसी कारण वे जंगलों के निकट रहना पसंद करते हैं और अपनी आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर रहते हैं। ये लोग प्रायः घने जंगलों में तथा पहाड़ियों की तलहटी में स्थित घाटियों में पाए जाते हैं।
धर्म
पंडो लोग भूतों के पूजा करते है। ये पेड़, पुरवजों के आत्मा, अउ प्रकृति के सब चिज का पुजा करते है। वे आपने आप को पाण्डव मानते है, जो हिंदु कथा से मेल खाता है। लेकिन पूजा करने के लिए अउ अपने बिमार का इलाज करने के लिए जादू-टोना में आश्रय रखते है। वे भूतो में विश्वास करते है और ये बिश्वास करते है की धरती में सभी के आत्मा होता है।